Lesson 1
संख्याओं का परिवार, गुणनखंड और अभाज्य संख्याएँ
इस पाठ में आप क्या सीखोगे
अध्याय 1 का लगभग हर सवाल अभाज्य गुणनखंडन से शुरू होता है। यह पाठ उसकी नींव है। हम हर बात शुरू से, एक-एक करके समझेंगे।
- संख्याओं का परिवार: प्राकृत, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय, अपरिमेय और वास्तविक संख्याएँ।
- गुणनखंड, गुणज, अभाज्य, भाज्य और सहअभाज्य संख्याएँ।
- घात (जैसे 2³) का मतलब, और भाग जाने के आसान नियम।
- किसी भी संख्या का अभाज्य गुणनखंडन, दो तरीकों से।
शुरू करने से पहले
सम और विषम संख्या
सम संख्या वह है जिसमें 2 से पूरा भाग चला जाए, यानी कुछ न बचे। इसका आखिरी अंक 0, 2, 4, 6 या 8 होता है। जैसे 60 और 156
विषम संख्या वह है जिसमें 2 से भाग देने पर 1 बच जाता है। इसका आखिरी अंक 1, 3, 5, 7 या 9 होता है। जैसे 15 और 35
मान लो 10 चप्पलें हैं। 5 जोड़ी बन जाएँगी, कोई अकेली नहीं बचेगी। इसलिए 10 सम है। 7 चप्पलें हों, तो 3 जोड़ी बनेंगी और 1 अकेली बचेगी। इसलिए 7 विषम है।
भाग कैसे देते हैं (कॉपी वाला तरीका)
पहले चार शब्द समझ लो:
- भाज्य = जिस संख्या में भाग दे रहे हो।
- भाजक = जिस संख्या से भाग दे रहे हो।
- भागफल = भाग का जवाब।
- शेष = जो आखिर में बच जाए।
मान लो 60 टॉफ़ियाँ 2 बच्चों में बाँटनी हैं। यहाँ 60 भाज्य है और 2 भाजक है। हर बच्चे को 30 मिलीं, तो 30 भागफल है। कुछ नहीं बचा, तो शेष 0 है।
कॉपी में ऐसे लिखते हैं: भाजक ) भाज्य ( भागफल
उदाहरण: 60 ÷ 2
सबसे पहले समझो कि हमें क्या करना है। हमें 60 में 2 का भाग देना है। इसका मतलब है, पता लगाना है कि 60 में 2 कितनी बार पूरा आता है।
- 60 का पहला अंक 6 है। 6 में 2 जा सकता है, इसलिए 6 से शुरू करो।
अब 6 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 3 = 6 होता है, यानी ठीक 6 बन जाता है।
भागफल में 3 लिखो, और 6 के नीचे 6 लिखो।
अब 6 में से 6 माइनस करो: 6 − 6 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 60 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 0 है।
0 में 2 एक बार भी नहीं जाता, क्योंकि 2 × 0 = 0 होता है।
इसलिए भागफल में 0 लिखो। 0 − 0 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 60 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 60 ÷ 2 में भागफल 30 है और शेष 0 है। यानी 60 = 2 × 30
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 30 × 2 = 60 ✓
उदाहरण: 15 ÷ 3 (जब पहले अंक में भाग नहीं जाता)
- 15 का पहला अंक 1 है। 1, 3 से छोटा है, इसलिए 3 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 15 लो।
अब 15 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 5 = 15 होता है, यानी ठीक 15 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 15 के नीचे 15 लिखो।
अब 15 में से 15 माइनस करो: 15 − 15 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 15 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 15 ÷ 3 में भागफल 5 है और शेष 0 है। यानी 15 = 3 × 5
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 5 × 3 = 15 ✓
संख्याओं का परिवार
संख्याएँ एक परिवार जैसी हैं। बड़े परिवार के अंदर छोटे परिवार होते हैं। अब हर सदस्य से एक-एक करके मिलते हैं।
प्राकृत संख्याएँ
गिनती वाली संख्याएँ प्राकृत संख्याएँ हैं: 1, 2, 3, 4, ...
जब तुम चीज़ें गिनते हो, "एक, दो, तीन...", तो यही संख्याएँ बोलते हो।
0 प्राकृत संख्या नहीं है, क्योंकि गिनती 1 से शुरू होती है। −3 और भी प्राकृत नहीं हैं। "आधी किताब" गिनती में नहीं आती।
पूर्ण संख्याएँ
प्राकृत संख्याओं में 0 जोड़ दो, तो पूर्ण संख्याएँ बनती हैं: 0, 1, 2, 3, ...
खाली डिब्बे में कितनी गेंदें हैं? जवाब 0 है। यह 0 भी अब परिवार में आ गया।
−5 पूर्ण संख्या नहीं है, क्योंकि इसमें ऋण (माइनस) का निशान है।
पूर्णांक
पूर्ण संख्याएँ और उनकी ऋण वाली संख्याएँ मिलकर पूर्णांक कहलाती हैं: ..., −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3, ...
ऋण का मतलब है "उल्टी तरफ"। ठंड में तापमान 0 से 2 डिग्री नीचे जाए, तो उसे −2 डिग्री लिखते हैं।
पूर्णांक नहीं है। = 0.5 है, जो 0 और 1 के बीच में है। पर हर भिन्न पूर्णांक से बाहर नहीं होती। = 3 है, और 3 पूर्णांक है। इसलिए भिन्न को पहले सरल करो, फिर फैसला करो।
परिमेय संख्याएँ
जो संख्या के रूप में लिखी जा सके, वह परिमेय संख्या है। यहाँ p और q पूर्णांक हैं, और q शून्य नहीं है।
एक भिन्न है, जिसमें ऊपर p और नीचे q है। इसका मतलब है "p में q से भाग"। q शून्य इसलिए नहीं हो सकता, क्योंकि 0 से भाग का कोई मतलब नहीं बनता। 5 रोटियाँ "0 बच्चों" में कैसे बाँटोगे? कोई जवाब नहीं बनता।
उदाहरण:
- पहले से भिन्न में है।
- −3 = −, इसलिए −3 भी परिमेय है।
- 0.75 का मतलब है
ऊपर-नीचे दोनों में 25 से भाग दो: 75 ÷ 25 = 3 और 100 ÷ 25 = 4
इसलिए 0.75 = , यानी परिमेय। - 0.333... (3 हमेशा दोहराता है) भी परिमेय है, क्योंकि 0.333... =
1 ÷ 3 करके देखो: हर बार शेष 1 बचता है, और भागफल में 3 आता रहता है।
अपरिमेय संख्याएँ
जो संख्या के रूप में नहीं लिखी जा सकती, वह अपरिमेय संख्या है। जैसे √2, √3 और π
इनका दशमलव रूप कभी खत्म नहीं होता। और अंकों का कोई एक तय टुकड़ा हमेशा के लिए दोहराता भी नहीं रहता। जैसे √2 = 1.41421356... आगे चलता ही रहता है।
ये दोनों बातें साथ में चाहिए:
- सिर्फ "कभी खत्म न होना" काफी नहीं। 0.333... कभी खत्म नहीं होता, पर उसमें "3" हमेशा दोहराता है। इसलिए वह परिमेय है।
- ऐसे ही = 0.142857142857... में "142857" हमेशा दोहराता है। इसलिए भी परिमेय है।
- अलग-अलग अंक तो बार-बार आ सकते हैं। √2 = 1.41421356... में 1 तीन बार आ चुका है। बात सिर्फ इतनी है कि कोई एक टुकड़ा लगातार हमेशा नहीं दोहराता।
कुछ अंक देखकर हम सिर्फ अंदाज़ा लगा सकते हैं, सिद्ध नहीं कर सकते। √2 अपरिमेय है, यह पाठ 5 में पूरी उपपत्ति (सबूत) से सिद्ध करेंगे।
दो ज़रूरी सावधानियाँ:
- हर √ वाली संख्या अपरिमेय नहीं होती। 2 × 2 = 4, इसलिए √4 = 2 = परिमेय है।
- π = नहीं है। सिर्फ π के पास की वैल्यू है।
= 3.142857... और π = 3.14159... है। तीसरा दशमलव अंक ही अलग है। π अपरिमेय है।
वास्तविक संख्याएँ
सारी परिमेय और सारी अपरिमेय संख्याएँ मिलाकर वास्तविक संख्याएँ कहलाती हैं। ऊपर जितनी संख्याएँ पढ़ीं, सब वास्तविक हैं। इस अध्याय का नाम भी इसी से है।
| नाम | मतलब | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राकृत संख्याएँ | गिनती वाली, 1 से शुरू | 1, 2, 3, ... |
| पूर्ण संख्याएँ | प्राकृत संख्याएँ और 0 | 0, 1, 2, ... |
| पूर्णांक | पूर्ण संख्याएँ और ऋण वाली संख्याएँ | ..., −2, −1, 0, 1, 2, ... |
| परिमेय संख्याएँ | रूप में लिखी जा सकें, q शून्य न हो | , −3, 0.75 |
| अपरिमेय संख्याएँ | रूप में नहीं लिखी जा सकतीं | √2, √3, π |
| वास्तविक संख्याएँ | परिमेय और अपरिमेय, सब मिलाकर | ऊपर की सारी |
इसे एक स्कूल की तरह सोचो। पूरा स्कूल वास्तविक संख्याएँ हैं। इसके दो हिस्से हैं: परिमेय और अपरिमेय। परिमेय वाले हिस्से में पूर्णांकों की कक्षा है। उस कक्षा में पूर्ण संख्याओं की बेंच है, जिस पर प्राकृत संख्याएँ और 0 बैठे हैं।
गुणनखंड और गुणज
इस अध्याय में गुणनखंड, गुणज, अभाज्य और भाज्य की बातें सिर्फ प्राकृत संख्याओं के लिए हैं।
गुणनखंड
गुणनखंड वह संख्या है जिससे दी गई संख्या में पूरा भाग चला जाए, यानी शेष 0 बचे। 12 लड्डू जितने बच्चों में बराबर बँट जाएँ, वे सब 12 के गुणनखंड हैं।
गुणनखंड ढूँढने का आसान तरीका: ऐसी जोड़ियाँ बनाओ जिनका गुणा वह संख्या हो।
| जोड़ी | गुणा |
|---|---|
| 1 और 12 | 1 × 12 = 12 |
| 2 और 6 | 2 × 6 = 12 |
| 3 और 4 | 3 × 4 = 12 |
इसलिए 12 के गुणनखंड 1, 2, 3, 4, 6 और 12 हैं।
5, संख्या 12 का गुणनखंड नहीं है। भाग देकर देखो:
- 12 का पहला अंक 1 है। 1, 5 से छोटा है, इसलिए 5 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 12 लो।
अब 12 में 5 कितनी बार जाएगा? 5 का पहाड़ा देखो।
5 × 2 = 10 और 5 × 3 = 15 होता है।
15 तो 12 से बड़ा है, इसलिए 2 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 2 लिखो, और 12 के नीचे 10 लिखो।
अब 12 में से 10 माइनस करो: 12 − 10 = 2, यानी 2 बच गया।
अब 12 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 12 ÷ 5 में भागफल 2 है और शेष 2 है।
जाँच: भागफल × भाजक + शेष = भाज्य होना चाहिए। 2 × 5 = 10, और 10 + 2 = 12 ✓
शेष 2 है, 0 नहीं। इसलिए 5, संख्या 12 का गुणनखंड नहीं है।
गुणज
गुणज वह संख्या है जो किसी संख्या के पहाड़े में आती है। 4 का पहाड़ा: 4, 8, 12, 16, ... ये सब 4 के गुणज हैं। 10, संख्या 4 का गुणज नहीं है। पहाड़े में 8 के बाद सीधा 12 आता है।
दोनों एक ही बात को दो तरफ से कहते हैं। 3 × 4 = 12 है, इसलिए 3 संख्या 12 का गुणनखंड है, और 12 संख्या 3 का गुणज है।
अभाज्य, भाज्य और सहअभाज्य संख्याएँ
अभाज्य संख्या
अभाज्य संख्या 1 से बड़ी वह प्राकृत संख्या है, जिसके ठीक दो गुणनखंड हों: 1 और वह संख्या खुद।
7 लड्डू सोचो। इन्हें बराबर बाँटने के बस दो तरीके हैं।
या तो 1 बच्चे को सारे 7, या 7 बच्चों को 1-1
इसलिए 7 अभाज्य है।
पहली कुछ अभाज्य संख्याएँ: 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, ...
अभाज्य संख्याएँ बाकी संख्याओं की "ईंटें" हैं। 1 से बड़ी हर प्राकृत संख्या या तो खुद अभाज्य है, या अभाज्य संख्याओं के गुणा से बनती है। जैसे 12 = 2 × 2 × 3 है। यही बात पाठ 2 की प्रमेय है।
भाज्य संख्या
जिस प्राकृत संख्या के दो से ज़्यादा गुणनखंड हों, वह भाज्य संख्या है। 4 के गुणनखंड 1, 2 और 4 हैं। ये तीन हैं, इसलिए 4 भाज्य है।
कोई संख्या अभाज्य है या नहीं, कैसे जाँचें
1 और खुद के अलावा कोई और गुणनखंड ढूँढो। मिल गया, तो भाज्य। नहीं मिला, तो अभाज्य।
हर संख्या से भाग देकर देखना ज़रूरी नहीं। यह नियम काफी है:
अभाज्य संख्याओं 2, 3, 5, 7, ... से बारी-बारी जाँचो। जिस अभाज्य संख्या का वर्ग दी गई संख्या से बड़ा हो जाए, वहाँ रुक जाओ।
उदाहरण (आसान): 21
21 के अंकों का जोड़ 2 + 1 = 3 है, जो 3 से जाता है। इसलिए 21 में 3 से भाग जाएगा।
3 × 7 = 21 है, इसलिए 21 ÷ 3 = 7, शेष 0
3 एक और गुणनखंड मिला, इसलिए 21 भाज्य है।
उदाहरण (थोड़ा अलग): 29
- 2 से नहीं जाता, क्योंकि 29 विषम है।
- 3 से नहीं जाता, क्योंकि अंकों का जोड़ 2 + 9 = 11 है। 11 में 3 से भाग नहीं जाता।
- 5 से नहीं जाता, क्योंकि आखिरी अंक 9 है।
- अगली अभाज्य संख्या 7 है, पर 7 × 7 = 49 है, जो 29 से बड़ा है। इसलिए यहीं रुक जाओ।
इसलिए 29 अभाज्य है।
यह नियम सही क्यों है? मान लो 29 को 1 से बड़ी दो संख्याओं के गुणा में तोड़ सकते। अगर दोनों संख्याएँ 6 या उससे बड़ी होतीं, तो गुणा कम से कम 6 × 6 = 36 होता। पर 36 तो 29 से बड़ा है। इसलिए कोई एक संख्या 2, 3, 4 या 5 ज़रूर होती। 2, 3 और 5 से भाग नहीं गया। 4 से भी नहीं जाएगा, क्योंकि जिसमें 2 से भाग नहीं जाता, उसमें 4 से भी नहीं जाता। इसलिए 29 का 1 और 29 के अलावा कोई गुणनखंड नहीं है।
उदाहरण (परीक्षा जैसा): क्या 97 अभाज्य है?
प्रश्न क्या कह रहा है? क्या 97 का 1 और 97 के अलावा भी कोई गुणनखंड है?
कौन-सा नियम लगेगा? ऊपर वाला नियम। किन अभाज्य संख्याओं से जाँचना है, यह वर्ग से तय होगा। 7 × 7 = 49 है, जो 97 से छोटा है। 11 × 11 = 121 है, जो 97 से बड़ा है। इसलिए सिर्फ 2, 3, 5 और 7 से जाँचना है।
हल:
स्टेप 1: 97 विषम है, इसलिए 2 से भाग नहीं जाता।
स्टेप 2: अंकों का जोड़ 9 + 7 = 16 है। 16 में 3 से भाग नहीं जाता, इसलिए 97 में भी नहीं।
स्टेप 3: 5 से भाग के लिए आखिरी अंक 0 या 5 होना चाहिए। यहाँ आखिरी अंक 7 है, इसलिए 5 से भाग नहीं जाता।
स्टेप 4: 7 का कोई आसान नियम नहीं है, इसलिए भाग देकर देखो।
- 97 का पहला अंक 9 है। 9 में 7 जा सकता है, इसलिए 9 से शुरू करो।
अब 9 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 1 = 7 और 7 × 2 = 14 होता है।
14 तो 9 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 9 के नीचे 7 लिखो।
अब 9 में से 7 माइनस करो: 9 − 7 = 2, यानी 2 बच गया। - अब 97 का अगला अंक 7 नीचे लाओ। बचे हुए 2 के साथ मिलकर 27 बन गया।
अब 27 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 3 = 21 और 7 × 4 = 28 होता है।
28 तो 27 से बड़ा है, इसलिए 3 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 3 लिखो, और 27 के नीचे 21 लिखो।
अब 27 में से 21 माइनस करो: 27 − 21 = 6, यानी 6 बच गया।
अब 97 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 97 ÷ 7 में भागफल 13 है और शेष 6 है।
जाँच: भागफल × भाजक + शेष = भाज्य होना चाहिए। 13 × 7 = 91, और 91 + 6 = 97 ✓
शेष 6 है, 0 नहीं। इसलिए 97 में 7 से पूरा भाग नहीं जाता।
अंतिम उत्तर: 97 में 2, 3, 5, 7 किसी से भाग नहीं गया। इसलिए 97 अभाज्य है।
जाँच: 13 × 7 = 91 और 91 + 6 = 97 ✓ (भागफल × भाजक + शेष = भाज्य)
2 से 96 तक हर संख्या से जाँचने की ज़रूरत नहीं पड़ी।
सहअभाज्य संख्याएँ
दो संख्याएँ सहअभाज्य हैं, अगर उनका साझा गुणनखंड सिर्फ 1 हो। "साझा" का मतलब है जो दोनों में हो। दोनों संख्याओं का खुद अभाज्य होना ज़रूरी नहीं।
उदाहरण: 8 और 15
- 8 के गुणनखंड: 1, 2, 4, 8
- 15 के गुणनखंड: 1, 3, 5, 15
- साझा सिर्फ 1 है। इसलिए 8 और 15 सहअभाज्य हैं, जबकि दोनों खुद भाज्य हैं।
सहअभाज्य नहीं: 6 और 9
- 6 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 6
- 9 के गुणनखंड: 1, 3, 9
- 3 भी साझा है। इसलिए 6 और 9 सहअभाज्य नहीं हैं।
यह बात पाठ 5 में काम आएगी। वहाँ √2 की उपपत्ति में p और q को सहअभाज्य मानकर चलते हैं।
घात का मतलब
जब एक ही संख्या बार-बार गुणा हो, तो उसे छोटा करके घात में लिखते हैं।
- नीचे वाली संख्या 2 आधार है।
- ऊपर वाली छोटी संख्या 3 घात है। यह बताती है कि आधार कितनी बार गुणा हुआ।
उदाहरण:
- 2³ = 2 × 2 × 2 = 8, इसे "2 की घात 3" पढ़ते हैं।
- 3² = 3 × 3 = 9, इसे "3 का वर्ग" भी कहते हैं।
- 5 = 5¹, अकेली संख्या की घात 1 होती है। इसे लिखा नहीं जाता।
अभाज्य गुणनखंडन में एक ही संख्या कई बार आती है। घात से उत्तर छोटा और साफ लिखा जाता है।
घात को साधारण गुणा मत समझो। 2³ का मतलब 2 × 2 × 2 = 8 है, 2 × 3 = 6 नहीं।
भाग जाने के नियम
इन नियमों से बिना भाग दिए पता चल जाता है कि भाग जाएगा या नहीं।
| संख्या | कब पूरा भाग जाता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| 2 | आखिरी अंक 0, 2, 4, 6 या 8 हो | 156 (आखिरी अंक 6) |
| 3 | सारे अंकों का जोड़ 3 से भाग जाए | 3825: 3 + 8 + 2 + 5 = 18, और 18 ÷ 3 = 6 |
| 5 | आखिरी अंक 0 या 5 हो | 140, 3825 |
| 7 | कोई आसान नियम नहीं, सीधा भाग देकर देखो | 1001 ÷ 7 = 143 (नीचे देखो) |
3 वाला नियम उल्टा भी काम करता है। 3826 के अंकों का जोड़ 3 + 8 + 2 + 6 = 19 है, जिसमें 3 से भाग नहीं जाता। इसलिए 3826 में भी नहीं जाएगा।
7 के लिए भाग देकर देखो: 1001 ÷ 7
- 1001 का पहला अंक 1 है। 1, 7 से छोटा है, इसलिए 7 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 10 लो।
अब 10 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 1 = 7 और 7 × 2 = 14 होता है।
14 तो 10 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 10 के नीचे 7 लिखो।
अब 10 में से 7 माइनस करो: 10 − 7 = 3, यानी 3 बच गया। - अब 1001 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। बचे हुए 3 के साथ मिलकर 30 बन गया।
अब 30 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 4 = 28 और 7 × 5 = 35 होता है।
35 तो 30 से बड़ा है, इसलिए 4 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 4 लिखो, और 30 के नीचे 28 लिखो।
अब 30 में से 28 माइनस करो: 30 − 28 = 2, यानी 2 बच गया। - अब 1001 का अगला अंक 1 नीचे लाओ। बचे हुए 2 के साथ मिलकर 21 बन गया।
अब 21 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 3 = 21 होता है, यानी ठीक 21 बन जाता है।
भागफल में 3 लिखो, और 21 के नीचे 21 लिखो।
अब 21 में से 21 माइनस करो: 21 − 21 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 1001 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 1001 ÷ 7 में भागफल 143 है और शेष 0 है। यानी 1001 = 7 × 143
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 143 × 7 = 1001 ✓
अभाज्य गुणनखंडन
किसी संख्या को सिर्फ अभाज्य संख्याओं के गुणनफल (गुणा का जवाब) में लिखना अभाज्य गुणनखंडन है।
जैसे एक दीवार तोड़ो, तो आखिर में ईंटें बचती हैं। वैसे ही संख्या को तोड़ते जाओ, तो आखिर में अभाज्य संख्याएँ बचती हैं।
12 = 2 × 2 × 3 अभाज्य गुणनखंडन है, क्योंकि 2, 2 और 3 सब अभाज्य हैं।
12 = 3 × 4 सही गुणा है, पर अभाज्य गुणनखंडन नहीं, क्योंकि 4 अभाज्य नहीं है।
आखिर में सिर्फ अभाज्य संख्याएँ ही क्यों? कोई भाज्य संख्या बची, तो उसे और तोड़ सकते हैं। यानी काम अधूरा है। अभाज्य संख्या को 1 और खुद के अलावा तोड़ा ही नहीं जा सकता, इसलिए वहीं रुकते हैं। और हर भाग के बाद भागफल छोटा होता जाता है, इसलिए यह काम खत्म ज़रूर होता है।
तरीका 1: बार-बार भाग देकर
तरीका छोटे में:
- सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 से भाग दो। जब तक भाग जाए, 2 से ही देते रहो।
- 2 से भाग न जाए, तो अगली अभाज्य संख्या 3 लो, फिर 5, फिर 7, ...
- भागफल 1 आ जाए, तो रुक जाओ।
- जितनी अभाज्य संख्याओं से भाग दिया, सबका गुणा लिखो। एक जैसी संख्याएँ घात में।
- वापस गुणा करके जाँचो।
सबसे छोटी अभाज्य संख्या से इसलिए शुरू करते हैं, ताकि कोई अभाज्य गुणनखंड छूट न जाए।
उदाहरण 1 (आसान): 60 का अभाज्य गुणनखंडन
प्रश्न क्या कह रहा है? 60 को ऐसे गुणा के रूप में लिखो, जिसमें हर संख्या अभाज्य हो।
हमें क्या निकालना है? 60 = (अभाज्य संख्याओं का गुणा), एक जैसी संख्याएँ घात में।
हल:
स्टेप 1: 60 सम है, इसलिए 2 से भाग दो। यह भाग ऊपर पूरा करके देखा था: 60 ÷ 2 = 30, शेष 0
स्टेप 2: 30 भी सम है, इसलिए फिर 2 से भाग दो।
- 30 का पहला अंक 3 है। 3 में 2 जा सकता है, इसलिए 3 से शुरू करो।
अब 3 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 1 = 2 और 2 × 2 = 4 होता है।
4 तो 3 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 3 के नीचे 2 लिखो।
अब 3 में से 2 माइनस करो: 3 − 2 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 30 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 10 बन गया।
अब 10 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 5 = 10 होता है, यानी ठीक 10 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 10 के नीचे 10 लिखो।
अब 10 में से 10 माइनस करो: 10 − 10 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 30 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 30 ÷ 2 में भागफल 15 है और शेष 0 है। यानी 30 = 2 × 15
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 15 × 2 = 30 ✓
स्टेप 3: 15 विषम है, इसलिए 2 से भाग नहीं जाएगा। अगली अभाज्य संख्या 3 लो। 15 के अंकों का जोड़ 1 + 5 = 6 है, जो 3 से जाता है। यह भाग भी ऊपर देखा था: 15 ÷ 3 = 5, शेष 0
स्टेप 4: 5 खुद अभाज्य है। 5 × 1 = 5, इसलिए 5 ÷ 5 = 1
भागफल 1 आ गया, अब रुक जाओ।
स्टेप 5: हमने 2, 2, 3 और 5 से भाग दिया। इन सबका गुणा लिखो। 2 दो बार आया, इसलिए 2 × 2 = 2²
कॉपी में यह सीढ़ी जैसा दिखता है। बाईं तरफ भाजक, दाईं तरफ हर बार का भागफल:
अंतिम उत्तर: 60 = 2² × 3 × 5
उदाहरण 2 (थोड़ा अलग): 210 का अभाज्य गुणनखंडन
यहाँ भाग के बीच में भागफल में 0 आएगा। यही इस उदाहरण की नई बात है।
प्रश्न क्या कह रहा है? 210 को सिर्फ अभाज्य संख्याओं के गुणा के रूप में लिखो।
कौन-सा तरीका लगेगा? बार-बार भाग देने वाला तरीका, 2 से शुरू करके।
हल:
स्टेप 1: 210 का आखिरी अंक 0 है, इसलिए 210 सम है। 2 से भाग दो।
- 210 का पहला अंक 2 है। 2 में 2 जा सकता है, इसलिए 2 से शुरू करो।
अब 2 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 1 = 2 होता है, यानी ठीक 2 बन जाता है।
भागफल में 1 लिखो, और 2 के नीचे 2 लिखो।
अब 2 में से 2 माइनस करो: 2 − 2 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 210 का अगला अंक 1 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 1 है।
1, 2 से छोटा है, इसलिए 2 इसमें एक बार भी नहीं जाता।
इसलिए भागफल में 0 लिखो। 1 में से 0 माइनस करो, तो 1 ही बचा। - अब 210 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 10 बन गया।
अब 10 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 5 = 10 होता है, यानी ठीक 10 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 10 के नीचे 10 लिखो।
अब 10 में से 10 माइनस करो: 10 − 10 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 210 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 210 ÷ 2 में भागफल 105 है और शेष 0 है। यानी 210 = 2 × 105
भागफल में 0 लिखना क्यों ज़रूरी है? 0 छोड़ दो, तो जवाब 15 आता। पर 15 × 2 = 30 होता है, 210 नहीं। इसलिए बीच का 0 ज़रूर लिखो।
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 105 × 2 = 210 ✓
स्टेप 2: 105 विषम है, इसलिए 2 से नहीं जाएगा। अंकों का जोड़ 1 + 0 + 5 = 6 है, जो 3 से जाता है। इसलिए 3 से भाग दो।
- 105 का पहला अंक 1 है। 1, 3 से छोटा है, इसलिए 3 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 10 लो।
अब 10 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 3 = 9 और 3 × 4 = 12 होता है।
12 तो 10 से बड़ा है, इसलिए 3 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 3 लिखो, और 10 के नीचे 9 लिखो।
अब 10 में से 9 माइनस करो: 10 − 9 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 105 का अगला अंक 5 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 15 बन गया।
अब 15 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 5 = 15 होता है, यानी ठीक 15 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 15 के नीचे 15 लिखो।
अब 15 में से 15 माइनस करो: 15 − 15 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 105 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 105 ÷ 3 में भागफल 35 है और शेष 0 है। यानी 105 = 3 × 35
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 35 × 3 = 105 ✓
स्टेप 3: 35 का आखिरी अंक 5 है, इसलिए 5 से भाग दो।
- 35 का पहला अंक 3 है। 3, 5 से छोटा है, इसलिए 5 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 35 लो।
अब 35 में 5 कितनी बार जाएगा? 5 का पहाड़ा देखो।
5 × 7 = 35 होता है, यानी ठीक 35 बन जाता है।
भागफल में 7 लिखो, और 35 के नीचे 35 लिखो।
अब 35 में से 35 माइनस करो: 35 − 35 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 35 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 35 ÷ 5 में भागफल 7 है और शेष 0 है। यानी 35 = 5 × 7
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 7 × 5 = 35 ✓
स्टेप 4: 7 खुद अभाज्य है। 7 ÷ 7 = 1, अब रुक जाओ।
अंतिम उत्तर: 210 = 2 × 3 × 5 × 7
यहाँ कोई अभाज्य संख्या दोबारा नहीं आई, इसलिए घात की ज़रूरत नहीं पड़ी।
तरीका 2: गुणनखंड वृक्ष
गुणनखंड वृक्ष में संख्या को दो गुणनखंडों में तोड़ते जाते हैं। जैसे पेड़ की एक डाल से दो छोटी डालें निकलती हैं। जब तक सारे गुणनखंड अभाज्य न हो जाएँ, तोड़ते रहो।
उदाहरण 3 (आसान वृक्ष): 60 का गुणनखंड वृक्ष
60 = 6 × 10 लिख सकते हैं, क्योंकि 6 × 10 = 60 है। फिर दोनों डालें और टूटती हैं: 6 = 2 × 3 और 10 = 2 × 5
नीचे की सारी संख्याएँ 2, 3, 2, 5 अभाज्य हैं, इसलिए अब रुक जाओ। इसलिए 60 = 2 × 2 × 3 × 5 = 2² × 3 × 5
तरीका 1 में भी 60 का यही उत्तर आया था। पहला टुकड़ा अलग चुना (6 × 10), फिर भी अभाज्य गुणनखंड वही आए। 60 = 4 × 15 से शुरू करो, तब भी 4 = 2 × 2 और 15 = 3 × 5 मिलेंगे। यानी फिर वही उत्तर आएगा।
उदाहरण 4 (किताब वाला, परीक्षा जैसा): NCERT किताब में 32760 का गुणनखंड वृक्ष दिया है। हर बार बाईं डाल पर एक अभाज्य संख्या है, और दाईं डाल पर बाकी संख्या, जिसे आगे तोड़ना है:
प्रश्न क्या कह रहा है? वृक्ष की हर डाल कैसे बनी, यह भाग देकर समझना है। फिर 32760 का अभाज्य गुणनखंडन लिखना है।
हल:
स्टेप 1: 32760 सम है, इसलिए 2 से भाग दो।
- 32760 का पहला अंक 3 है। 3 में 2 जा सकता है, इसलिए 3 से शुरू करो।
अब 3 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 1 = 2 और 2 × 2 = 4 होता है।
4 तो 3 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 3 के नीचे 2 लिखो।
अब 3 में से 2 माइनस करो: 3 − 2 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 32760 का अगला अंक 2 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 12 बन गया।
अब 12 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 6 = 12 होता है, यानी ठीक 12 बन जाता है।
भागफल में 6 लिखो, और 12 के नीचे 12 लिखो।
अब 12 में से 12 माइनस करो: 12 − 12 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 32760 का अगला अंक 7 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 7 है।
अब 7 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 3 = 6 और 2 × 4 = 8 होता है।
8 तो 7 से बड़ा है, इसलिए 3 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 3 लिखो, और 7 के नीचे 6 लिखो।
अब 7 में से 6 माइनस करो: 7 − 6 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 32760 का अगला अंक 6 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 16 बन गया।
अब 16 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 8 = 16 होता है, यानी ठीक 16 बन जाता है।
भागफल में 8 लिखो, और 16 के नीचे 16 लिखो।
अब 16 में से 16 माइनस करो: 16 − 16 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 32760 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 0 है।
0 में 2 एक बार भी नहीं जाता, क्योंकि 2 × 0 = 0 होता है।
इसलिए भागफल में 0 लिखो। 0 − 0 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 32760 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 32760 ÷ 2 में भागफल 16380 है और शेष 0 है। यानी 32760 = 2 × 16380
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 16380 × 2 = 32760 ✓
स्टेप 2: 16380 भी सम है, इसलिए फिर 2 से भाग दो।
- 16380 का पहला अंक 1 है। 1, 2 से छोटा है, इसलिए 2 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 16 लो।
अब 16 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 8 = 16 होता है, यानी ठीक 16 बन जाता है।
भागफल में 8 लिखो, और 16 के नीचे 16 लिखो।
अब 16 में से 16 माइनस करो: 16 − 16 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 16380 का अगला अंक 3 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 3 है।
अब 3 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 1 = 2 और 2 × 2 = 4 होता है।
4 तो 3 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 3 के नीचे 2 लिखो।
अब 3 में से 2 माइनस करो: 3 − 2 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 16380 का अगला अंक 8 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 18 बन गया।
अब 18 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 9 = 18 होता है, यानी ठीक 18 बन जाता है।
भागफल में 9 लिखो, और 18 के नीचे 18 लिखो।
अब 18 में से 18 माइनस करो: 18 − 18 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 16380 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 0 है।
0 में 2 एक बार भी नहीं जाता, क्योंकि 2 × 0 = 0 होता है।
इसलिए भागफल में 0 लिखो। 0 − 0 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 16380 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 16380 ÷ 2 में भागफल 8190 है और शेष 0 है। यानी 16380 = 2 × 8190
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 8190 × 2 = 16380 ✓
स्टेप 3: 8190 भी सम है। इस भाग में भागफल के बीच में 0 आता है, इसलिए ध्यान से देखो।
- 8190 का पहला अंक 8 है। 8 में 2 जा सकता है, इसलिए 8 से शुरू करो।
अब 8 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 4 = 8 होता है, यानी ठीक 8 बन जाता है।
भागफल में 4 लिखो, और 8 के नीचे 8 लिखो।
अब 8 में से 8 माइनस करो: 8 − 8 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 8190 का अगला अंक 1 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 1 है।
1, 2 से छोटा है, इसलिए 2 इसमें एक बार भी नहीं जाता।
इसलिए भागफल में 0 लिखो। 1 में से 0 माइनस करो, तो 1 ही बचा। - अब 8190 का अगला अंक 9 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 19 बन गया।
अब 19 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 9 = 18 और 2 × 10 = 20 होता है।
20 तो 19 से बड़ा है, इसलिए 9 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 9 लिखो, और 19 के नीचे 18 लिखो।
अब 19 में से 18 माइनस करो: 19 − 18 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 8190 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 10 बन गया।
अब 10 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 5 = 10 होता है, यानी ठीक 10 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 10 के नीचे 10 लिखो।
अब 10 में से 10 माइनस करो: 10 − 10 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 8190 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 8190 ÷ 2 में भागफल 4095 है और शेष 0 है। यानी 8190 = 2 × 4095
भागफल में 0 लिखना क्यों ज़रूरी है? 0 छोड़ दो, तो जवाब 495 आता। पर 495 × 2 = 990 होता है, 8190 नहीं। इसलिए बीच का 0 ज़रूर लिखो।
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 4095 × 2 = 8190 ✓
स्टेप 4: 4095 विषम है, इसलिए 2 से नहीं जाएगा। अंकों का जोड़ 4 + 0 + 9 + 5 = 18 है, जो 3 से जाता है। इसलिए 3 से भाग दो।
- 4095 का पहला अंक 4 है। 4 में 3 जा सकता है, इसलिए 4 से शुरू करो।
अब 4 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 1 = 3 और 3 × 2 = 6 होता है।
6 तो 4 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 4 के नीचे 3 लिखो।
अब 4 में से 3 माइनस करो: 4 − 3 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 4095 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 10 बन गया।
अब 10 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 3 = 9 और 3 × 4 = 12 होता है।
12 तो 10 से बड़ा है, इसलिए 3 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 3 लिखो, और 10 के नीचे 9 लिखो।
अब 10 में से 9 माइनस करो: 10 − 9 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 4095 का अगला अंक 9 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 19 बन गया।
अब 19 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 6 = 18 और 3 × 7 = 21 होता है।
21 तो 19 से बड़ा है, इसलिए 6 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 6 लिखो, और 19 के नीचे 18 लिखो।
अब 19 में से 18 माइनस करो: 19 − 18 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 4095 का अगला अंक 5 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 15 बन गया।
अब 15 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 5 = 15 होता है, यानी ठीक 15 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 15 के नीचे 15 लिखो।
अब 15 में से 15 माइनस करो: 15 − 15 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 4095 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 4095 ÷ 3 में भागफल 1365 है और शेष 0 है। यानी 4095 = 3 × 1365
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 1365 × 3 = 4095 ✓
स्टेप 5: 1365 के अंकों का जोड़ 1 + 3 + 6 + 5 = 15 है, जो 3 से जाता है। इसलिए फिर 3 से भाग दो।
- 1365 का पहला अंक 1 है। 1, 3 से छोटा है, इसलिए 3 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 13 लो।
अब 13 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 4 = 12 और 3 × 5 = 15 होता है।
15 तो 13 से बड़ा है, इसलिए 4 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 4 लिखो, और 13 के नीचे 12 लिखो।
अब 13 में से 12 माइनस करो: 13 − 12 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 1365 का अगला अंक 6 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 16 बन गया।
अब 16 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 5 = 15 और 3 × 6 = 18 होता है।
18 तो 16 से बड़ा है, इसलिए 5 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 5 लिखो, और 16 के नीचे 15 लिखो।
अब 16 में से 15 माइनस करो: 16 − 15 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 1365 का अगला अंक 5 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 15 बन गया।
अब 15 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 5 = 15 होता है, यानी ठीक 15 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 15 के नीचे 15 लिखो।
अब 15 में से 15 माइनस करो: 15 − 15 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 1365 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 1365 ÷ 3 में भागफल 455 है और शेष 0 है। यानी 1365 = 3 × 455
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 455 × 3 = 1365 ✓
स्टेप 6: 455 के अंकों का जोड़ 4 + 5 + 5 = 14 है, जो 3 से नहीं जाता। आखिरी अंक 5 है, इसलिए 5 से भाग दो।
- 455 का पहला अंक 4 है। 4, 5 से छोटा है, इसलिए 5 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 45 लो।
अब 45 में 5 कितनी बार जाएगा? 5 का पहाड़ा देखो।
5 × 9 = 45 होता है, यानी ठीक 45 बन जाता है।
भागफल में 9 लिखो, और 45 के नीचे 45 लिखो।
अब 45 में से 45 माइनस करो: 45 − 45 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 455 का अगला अंक 5 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 5 है।
अब 5 में 5 कितनी बार जाएगा? 5 का पहाड़ा देखो।
5 × 1 = 5 होता है, यानी ठीक 5 बन जाता है।
भागफल में 1 लिखो, और 5 के नीचे 5 लिखो।
अब 5 में से 5 माइनस करो: 5 − 5 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 455 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 455 ÷ 5 में भागफल 91 है और शेष 0 है। यानी 455 = 5 × 91
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 91 × 5 = 455 ✓
स्टेप 7: 91 विषम है, इसलिए 2 से नहीं जाता। अंकों का जोड़ 9 + 1 = 10 है, इसलिए 3 से नहीं। आखिरी अंक 1 है, इसलिए 5 से भी नहीं। अगली अभाज्य संख्या 7 लो।
- 91 का पहला अंक 9 है। 9 में 7 जा सकता है, इसलिए 9 से शुरू करो।
अब 9 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 1 = 7 और 7 × 2 = 14 होता है।
14 तो 9 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 9 के नीचे 7 लिखो।
अब 9 में से 7 माइनस करो: 9 − 7 = 2, यानी 2 बच गया। - अब 91 का अगला अंक 1 नीचे लाओ। बचे हुए 2 के साथ मिलकर 21 बन गया।
अब 21 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 3 = 21 होता है, यानी ठीक 21 बन जाता है।
भागफल में 3 लिखो, और 21 के नीचे 21 लिखो।
अब 21 में से 21 माइनस करो: 21 − 21 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 91 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 91 ÷ 7 में भागफल 13 है और शेष 0 है। यानी 91 = 7 × 13
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 13 × 7 = 91 ✓
स्टेप 8: 7 और 13 दोनों अभाज्य हैं। अब रुक जाओ। 2 तीन बार आया, इसलिए 2³ लिखो। 3 दो बार आया, इसलिए 3² लिखो।
अंतिम उत्तर: 32760 = 2³ × 3² × 5 × 7 × 13
91 देखने में अभाज्य लगती है, पर 91 = 7 × 13 है। इसलिए 2, 3, 5 के बाद 7 से भी ज़रूर जाँचो।
किसी भी तरीके से तोड़ो, अभाज्य गुणनखंड हमेशा वही आते हैं। बस उनका क्रम बदल सकता है। यही बात पाठ 2 की प्रमेय पक्की करती है। परीक्षा में उन्हें छोटी से बड़ी के क्रम में लिखो, इससे उत्तर साफ दिखता है।
परीक्षा में यह कहाँ आता है
अभाज्य गुणनखंडन सीधे भी पूछा जाता है। NCERT प्रश्नावली 1.1 का प्रश्न 1 यही है, जिसे हम पाठ 4 में हल करेंगे। HCF और LCM के सवालों में भी पहला स्टेप यही होता है। यह पाठ 3 में आएगा।
आम गलतियाँ
| गलत | सही | क्यों |
|---|---|---|
| 1 अभाज्य है | 1 न अभाज्य है, न भाज्य | अभाज्य के लिए ठीक दो गुणनखंड चाहिए, 1 का सिर्फ एक है |
| 36 = 4 × 9 (अभाज्य गुणनखंडन) | 36 = 2² × 3² | 4 और 9 अभाज्य नहीं हैं, इन्हें और तोड़ना होगा |
| 2³ = 6 | 2³ = 2 × 2 × 2 = 8 | घात बताती है कि 2 को कितनी बार आपस में गुणा करना है |
| 315 ÷ 3 = 15 | 315 ÷ 3 = 105 | 1 में 3 नहीं जाता, तो भागफल में 0 लिखना ज़रूरी है |
| 60 = 2 × 3 × 5 | 60 = 2² × 3 × 5 | वापस गुणा करो: 2 × 3 × 5 = 30 आता है, 60 नहीं |
| √9 अपरिमेय है | √9 = 3 परिमेय है | 3 × 3 = 9, इसलिए वर्गमूल पूरा निकलता है |
| π = , इसलिए परिमेय | π अपरिमेय है | सिर्फ पास की वैल्यू है, बराबर नहीं |
इनमें से ज़्यादातर गलतियाँ एक आदत से पकड़ी जाती हैं: आखिर में उत्तर को वापस गुणा करके जाँचो।
खुद करके देखो (किताब से नहीं)
पहले खुद हल करो, फिर नीचे दिए हल से मिलाओ।
स्तर 1: शुरुआत
- 18 के सारे गुणनखंड लिखो।
- इनमें से अभाज्य संख्याएँ छाँटो: 1, 9, 13, 21, 29
- 3 × 3 × 3 × 3 को घात में लिखो और उसकी वैल्यू निकालो।
- क्या 0 प्राकृत संख्या है? क्या 0 पूर्ण संख्या है?
स्तर 2: अभ्यास
- 84 का अभाज्य गुणनखंडन करो।
- क्या 14 और 25 सहअभाज्य हैं? कारण बताओ।
- इनमें से परिमेय संख्याएँ छाँटो: 7, −4, , √2, 0.5, √16
- 51 अभाज्य है या भाज्य? कारण बताओ।
स्तर 3: परीक्षा अभ्यास (परीक्षा जैसे प्रश्न, पुराने प्रश्न पत्र से नहीं)
- 1260 का अभाज्य गुणनखंडन घात वाले रूप में करो।
- 2³ × 3² × 5 कौन-सी संख्या है?
- एक संख्या के अभाज्य गुणनखंड 2, 2, 3, 3 और 7 हैं। वह संख्या क्या है? उसे घात में भी लिखो।
- क्या 91 अभाज्य संख्या है? कारण सहित बताओ।
सारे प्रश्नों के हल
प्रश्न 1: 18 के सारे गुणनखंड
प्रश्न क्या कह रहा है? वे सारी संख्याएँ ढूँढो, जिनसे 18 में पूरा भाग जाए।
हमें क्या निकालना है? 18 के गुणनखंडों की पूरी सूची।
कौन-सा तरीका लगेगा? जोड़ियों वाला तरीका। ऐसी दो संख्याएँ ढूँढो, जिनका गुणा 18 हो। जोड़ी की दोनों संख्याएँ गुणनखंड होती हैं।
हल:
स्टेप 1: 1 से शुरू करो और एक-एक संख्या लेकर आगे बढ़ो।
| जोड़ी | गुणा |
|---|---|
| 1 और 18 | 1 × 18 = 18 |
| 2 और 9 | 2 × 9 = 18 |
| 3 और 6 | 3 × 6 = 18 |
स्टेप 2: अब 4 से जाँचो।
- 18 का पहला अंक 1 है। 1, 4 से छोटा है, इसलिए 4 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 18 लो।
अब 18 में 4 कितनी बार जाएगा? 4 का पहाड़ा देखो।
4 × 4 = 16 और 4 × 5 = 20 होता है।
20 तो 18 से बड़ा है, इसलिए 4 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 4 लिखो, और 18 के नीचे 16 लिखो।
अब 18 में से 16 माइनस करो: 18 − 16 = 2, यानी 2 बच गया।
अब 18 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 18 ÷ 4 में भागफल 4 है और शेष 2 है।
जाँच: भागफल × भाजक + शेष = भाज्य होना चाहिए। 4 × 4 = 16, और 16 + 2 = 18 ✓
शेष 2 है, इसलिए 4 गुणनखंड नहीं है।
स्टेप 3: 5 से भी भाग नहीं जाता, क्योंकि आखिरी अंक 8 है, 0 या 5 नहीं।
स्टेप 4: अगला 6 है, जो जोड़ी 3 और 6 में पहले ही आ चुका है। यहाँ से जोड़ियाँ दोहराने लगेंगी, इसलिए रुक जाओ।
अंतिम उत्तर: 18 के गुणनखंड 1, 2, 3, 6, 9 और 18 हैं।
जाँच: 9 × 2 = 18 और 6 × 3 = 18 है। इसलिए 9 और 6 से भी पूरा भाग जाता है ✓
अब तुम करो: 20 के सारे गुणनखंड लिखो।
उत्तर: 1, 2, 4, 5, 10, 20 (जोड़ियाँ: 1 × 20, 2 × 10, 4 × 5)
प्रश्न 2: अभाज्य संख्याएँ छाँटो
प्रश्न क्या कह रहा है? दी गई संख्याओं में से वे चुनो, जिनके ठीक दो गुणनखंड हों।
कौन-सा नियम लगेगा? 1 और खुद के अलावा कोई गुणनखंड मिले, तो भाज्य। न मिले, तो अभाज्य। 1 अलग मामला है।
हल:
स्टेप 1: 1 का सिर्फ एक गुणनखंड है, इसलिए 1 न अभाज्य है, न भाज्य।
स्टेप 2: 9 = 3 × 3, यानी 3 भी गुणनखंड है। इसलिए 9 भाज्य है।
स्टेप 3: 13 विषम है, इसलिए 2 से भाग नहीं जाता। अंकों का जोड़ 1 + 3 = 4 है, इसलिए 3 से भी नहीं। अगली अभाज्य संख्या 5 है, पर 5 × 5 = 25 है, जो 13 से बड़ा है। इसलिए 13 अभाज्य है।
स्टेप 4: 21 के अंकों का जोड़ 2 + 1 = 3 है, जो 3 से जाता है। 3 × 7 = 21, इसलिए 21 भाज्य है।
स्टेप 5: 29 में 2, 3 और 5 से भाग नहीं जाता। यह ऊपर "कैसे जाँचें" वाले हिस्से में दिखाया है। अगली अभाज्य संख्या 7 है, पर 7 × 7 = 49 है, जो 29 से बड़ा है। इसलिए 29 अभाज्य है।
अंतिम उत्तर: अभाज्य संख्याएँ 13 और 29 हैं।
जाँच: 13 और 29 दोनों ऊपर दी गई अभाज्य संख्याओं की सूची में हैं ✓
अब तुम करो: 31 और 33 में अभाज्य कौन है?
उत्तर: 31 अभाज्य है। 33 = 3 × 11 भाज्य है।
प्रश्न 3: 3 × 3 × 3 × 3 घात में
प्रश्न क्या कह रहा है? एक ही संख्या 3 बार-बार गुणा हो रही है। इसे घात में छोटा लिखो, फिर गुणा करके वैल्यू निकालो।
कौन-सा नियम लगेगा? घात बताती है कि आधार कितनी बार गुणा हुआ।
हल:
स्टेप 1: गिनो, 3 कितनी बार आया: 4 बार। इसलिए आधार 3 और घात 4 है।
स्टेप 2: अब एक-एक करके गुणा करो।
अंतिम उत्तर: 3 × 3 × 3 × 3 = 3⁴ = 81
3⁴ का मतलब 3 × 4 = 12 नहीं है।
अब तुम करो: 2 × 2 × 2 × 2 × 2 को घात में लिखो और वैल्यू निकालो।
उत्तर: 2⁵ = 32 (2, 4, 8, 16, 32)
प्रश्न 4: 0 प्राकृत है या पूर्ण?
प्रश्न क्या कह रहा है? 0 संख्याओं के परिवार में कहाँ आता है, यह बताना है।
कौन-सा नियम लगेगा? प्राकृत और पूर्ण संख्याओं की परिभाषा।
हल:
स्टेप 1: प्राकृत संख्याएँ गिनती वाली हैं और 1 से शुरू होती हैं। इसलिए 0 प्राकृत नहीं है।
स्टेप 2: पूर्ण संख्याएँ = प्राकृत संख्याएँ और 0, इसलिए 0 पूर्ण संख्या है।
अंतिम उत्तर: 0 प्राकृत संख्या नहीं है, पर पूर्ण संख्या है।
अब तुम करो: क्या −1 पूर्ण संख्या है?
उत्तर: नहीं। −1 में ऋण का निशान है, इसलिए यह पूर्णांक है, पूर्ण संख्या नहीं।
प्रश्न 5: 84 का अभाज्य गुणनखंडन
प्रश्न क्या कह रहा है? 84 को सिर्फ अभाज्य संख्याओं के गुणा के रूप में लिखो।
कौन-सा तरीका लगेगा? बार-बार भाग देने वाला तरीका, 2 से शुरू करके।
हल:
स्टेप 1: 84 सम है, इसलिए 2 से भाग दो।
- 84 का पहला अंक 8 है। 8 में 2 जा सकता है, इसलिए 8 से शुरू करो।
अब 8 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 4 = 8 होता है, यानी ठीक 8 बन जाता है।
भागफल में 4 लिखो, और 8 के नीचे 8 लिखो।
अब 8 में से 8 माइनस करो: 8 − 8 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 84 का अगला अंक 4 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 4 है।
अब 4 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 2 = 4 होता है, यानी ठीक 4 बन जाता है।
भागफल में 2 लिखो, और 4 के नीचे 4 लिखो।
अब 4 में से 4 माइनस करो: 4 − 4 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 84 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 84 ÷ 2 में भागफल 42 है और शेष 0 है। यानी 84 = 2 × 42
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 42 × 2 = 84 ✓
स्टेप 2: 42 भी सम है, इसलिए फिर 2 से भाग दो।
- 42 का पहला अंक 4 है। 4 में 2 जा सकता है, इसलिए 4 से शुरू करो।
अब 4 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 2 = 4 होता है, यानी ठीक 4 बन जाता है।
भागफल में 2 लिखो, और 4 के नीचे 4 लिखो।
अब 4 में से 4 माइनस करो: 4 − 4 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 42 का अगला अंक 2 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 2 है।
अब 2 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 1 = 2 होता है, यानी ठीक 2 बन जाता है।
भागफल में 1 लिखो, और 2 के नीचे 2 लिखो।
अब 2 में से 2 माइनस करो: 2 − 2 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 42 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 42 ÷ 2 में भागफल 21 है और शेष 0 है। यानी 42 = 2 × 21
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 21 × 2 = 42 ✓
स्टेप 3: 21 विषम है, इसलिए 2 से नहीं जाएगा। अंकों का जोड़ 2 + 1 = 3 है, जो 3 से जाता है। इसलिए 3 से भाग दो।
- 21 का पहला अंक 2 है। 2, 3 से छोटा है, इसलिए 3 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 21 लो।
अब 21 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 7 = 21 होता है, यानी ठीक 21 बन जाता है।
भागफल में 7 लिखो, और 21 के नीचे 21 लिखो।
अब 21 में से 21 माइनस करो: 21 − 21 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 21 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 21 ÷ 3 में भागफल 7 है और शेष 0 है। यानी 21 = 3 × 7
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 7 × 3 = 21 ✓
स्टेप 4: 7 अभाज्य है। 7 ÷ 7 = 1, अब रुक जाओ।
अंतिम उत्तर: 84 = 2² × 3 × 7
अब तुम करो: 90 का अभाज्य गुणनखंडन करो।
उत्तर: 90 = 2 × 3² × 5 (90 ÷ 2 = 45, 45 ÷ 3 = 15, 15 ÷ 3 = 5, 5 ÷ 5 = 1)
प्रश्न 6: क्या 14 और 25 सहअभाज्य हैं?
प्रश्न क्या कह रहा है? क्या 14 और 25 में 1 के अलावा कोई साझा गुणनखंड है?
कौन-सा नियम लगेगा? साझा गुणनखंड सिर्फ 1 हो, तो दोनों संख्याएँ सहअभाज्य हैं।
हल:
स्टेप 1: 14 के गुणनखंड: 1, 2, 7, 14 (क्योंकि 1 × 14 = 14 और 2 × 7 = 14)
स्टेप 2: 25 के गुणनखंड: 1, 5, 25 (क्योंकि 1 × 25 = 25 और 5 × 5 = 25)
स्टेप 3: दोनों सूचियाँ मिलाओ। साझा सिर्फ 1 है।
अंतिम उत्तर: 14 और 25 सहअभाज्य हैं, जबकि दोनों खुद भाज्य संख्याएँ हैं।
अब तुम करो: क्या 9 और 16 सहअभाज्य हैं?
उत्तर: हाँ। 9 के गुणनखंड 1, 3, 9 हैं और 16 के 1, 2, 4, 8, 16 हैं। साझा सिर्फ 1 है।
प्रश्न 7: परिमेय संख्याएँ छाँटो
प्रश्न क्या कह रहा है? दी गई संख्याओं में से वे चुनो, जो रूप में लिखी जा सकें।
कौन-सा नियम लगेगा? जो संख्या रूप में लिखी जा सके, वह परिमेय है। यहाँ p और q पूर्णांक हैं, और q शून्य नहीं है।
हल:
स्टेप 1: 7 = और −4 = −, इसलिए दोनों परिमेय हैं।
स्टेप 2: पहले से रूप में है, इसलिए परिमेय है।
स्टेप 3: 0.5 का मतलब है। ऊपर-नीचे दोनों में 5 से भाग दो: 5 ÷ 5 = 1 और 10 ÷ 5 = 2
इसलिए 0.5 = , यानी परिमेय।
स्टेप 4: 4 × 4 = 16 है, इसलिए √16 = 4 = , यानी परिमेय।
स्टेप 5: √2 को रूप में नहीं लिख सकते। यह अपरिमेय है। इसकी उपपत्ति पाठ 5 में है।
अंतिम उत्तर: परिमेय संख्याएँ 7, −4, , 0.5 और √16 हैं।
अब तुम करो: √25 परिमेय है या अपरिमेय?
उत्तर: परिमेय, क्योंकि 5 × 5 = 25, इसलिए √25 = 5 =
प्रश्न 8: 51 अभाज्य है या भाज्य?
प्रश्न क्या कह रहा है? क्या 51 का 1 और 51 के अलावा भी कोई गुणनखंड है?
कौन-सा नियम लगेगा? भाग जाने के नियम, फिर भाग देकर पक्का करना।
हल:
स्टेप 1: 51 विषम है, इसलिए 2 से भाग नहीं जाता।
स्टेप 2: अंकों का जोड़ 5 + 1 = 6 है, जो 3 से जाता है। इसलिए 51 में भी 3 से भाग जाएगा।
- 51 का पहला अंक 5 है। 5 में 3 जा सकता है, इसलिए 5 से शुरू करो।
अब 5 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 1 = 3 और 3 × 2 = 6 होता है।
6 तो 5 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 5 के नीचे 3 लिखो।
अब 5 में से 3 माइनस करो: 5 − 3 = 2, यानी 2 बच गया। - अब 51 का अगला अंक 1 नीचे लाओ। बचे हुए 2 के साथ मिलकर 21 बन गया।
अब 21 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 7 = 21 होता है, यानी ठीक 21 बन जाता है।
भागफल में 7 लिखो, और 21 के नीचे 21 लिखो।
अब 21 में से 21 माइनस करो: 21 − 21 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 51 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 51 ÷ 3 में भागफल 17 है और शेष 0 है। यानी 51 = 3 × 17
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 17 × 3 = 51 ✓
अंतिम उत्तर: 51 = 3 × 17 है। 1 और 51 के अलावा 3 भी गुणनखंड है, इसलिए 51 भाज्य है।
अब तुम करो: 57 अभाज्य है या भाज्य?
उत्तर: भाज्य। अंकों का जोड़ 5 + 7 = 12 है, जो 3 से जाता है, और 57 = 3 × 19
प्रश्न 9: 1260 का अभाज्य गुणनखंडन
प्रश्न क्या कह रहा है? 1260 को अभाज्य संख्याओं के गुणा के रूप में लिखो। एक जैसी संख्याएँ घात में लिखनी हैं।
कौन-सा तरीका लगेगा? बार-बार भाग देने वाला तरीका, 2 से शुरू करके।
हल:
स्टेप 1: 1260 सम है, इसलिए 2 से भाग दो।
- 1260 का पहला अंक 1 है। 1, 2 से छोटा है, इसलिए 2 इसमें एक बार भी पूरा नहीं जाएगा।
इसलिए पहले दो अंक लो, यानी 12 लो।
अब 12 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 6 = 12 होता है, यानी ठीक 12 बन जाता है।
भागफल में 6 लिखो, और 12 के नीचे 12 लिखो।
अब 12 में से 12 माइनस करो: 12 − 12 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 1260 का अगला अंक 6 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 6 है।
अब 6 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 3 = 6 होता है, यानी ठीक 6 बन जाता है।
भागफल में 3 लिखो, और 6 के नीचे 6 लिखो।
अब 6 में से 6 माइनस करो: 6 − 6 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 1260 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 0 है।
0 में 2 एक बार भी नहीं जाता, क्योंकि 2 × 0 = 0 होता है।
इसलिए भागफल में 0 लिखो। 0 − 0 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 1260 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 1260 ÷ 2 में भागफल 630 है और शेष 0 है। यानी 1260 = 2 × 630
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 630 × 2 = 1260 ✓
स्टेप 2: 630 भी सम है, इसलिए फिर 2 से भाग दो।
- 630 का पहला अंक 6 है। 6 में 2 जा सकता है, इसलिए 6 से शुरू करो।
अब 6 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 3 = 6 होता है, यानी ठीक 6 बन जाता है।
भागफल में 3 लिखो, और 6 के नीचे 6 लिखो।
अब 6 में से 6 माइनस करो: 6 − 6 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 630 का अगला अंक 3 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 3 है।
अब 3 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 1 = 2 और 2 × 2 = 4 होता है।
4 तो 3 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 3 के नीचे 2 लिखो।
अब 3 में से 2 माइनस करो: 3 − 2 = 1, यानी 1 बच गया। - अब 630 का अगला अंक 0 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 10 बन गया।
अब 10 में 2 कितनी बार जाएगा? 2 का पहाड़ा देखो।
2 × 5 = 10 होता है, यानी ठीक 10 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 10 के नीचे 10 लिखो।
अब 10 में से 10 माइनस करो: 10 − 10 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 630 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 630 ÷ 2 में भागफल 315 है और शेष 0 है। यानी 630 = 2 × 315
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 315 × 2 = 630 ✓
स्टेप 3: 315 विषम है, इसलिए 2 से नहीं जाएगा। अंकों का जोड़ 3 + 1 + 5 = 9 है, जो 3 से जाता है। इसलिए 3 से भाग दो।
- 315 का पहला अंक 3 है। 3 में 3 जा सकता है, इसलिए 3 से शुरू करो।
अब 3 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 1 = 3 होता है, यानी ठीक 3 बन जाता है।
भागफल में 1 लिखो, और 3 के नीचे 3 लिखो।
अब 3 में से 3 माइनस करो: 3 − 3 = 0, यानी कुछ नहीं बचा। - अब 315 का अगला अंक 1 नीचे लाओ। पीछे कुछ नहीं बचा था, इसलिए अब हमारे पास सिर्फ 1 है।
1, 3 से छोटा है, इसलिए 3 इसमें एक बार भी नहीं जाता।
इसलिए भागफल में 0 लिखो। 1 में से 0 माइनस करो, तो 1 ही बचा। - अब 315 का अगला अंक 5 नीचे लाओ। बचे हुए 1 के साथ मिलकर 15 बन गया।
अब 15 में 3 कितनी बार जाएगा? 3 का पहाड़ा देखो।
3 × 5 = 15 होता है, यानी ठीक 15 बन जाता है।
भागफल में 5 लिखो, और 15 के नीचे 15 लिखो।
अब 15 में से 15 माइनस करो: 15 − 15 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 315 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 315 ÷ 3 में भागफल 105 है और शेष 0 है। यानी 315 = 3 × 105
भागफल में 0 लिखना क्यों ज़रूरी है? 0 छोड़ दो, तो जवाब 15 आता। पर 15 × 3 = 45 होता है, 315 नहीं। इसलिए बीच का 0 ज़रूर लिखो।
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 105 × 3 = 315 ✓
स्टेप 4: 105 के अंकों का जोड़ 1 + 0 + 5 = 6 है, फिर 3 से भाग दो। यह भाग उदाहरण 2 में पूरा करके दिखाया है: 105 ÷ 3 = 35
स्टेप 5: 35 का आखिरी अंक 5 है। 5 × 7 = 35, इसलिए 35 ÷ 5 = 7 (यह भी उदाहरण 2 में है)
स्टेप 6: 7 अभाज्य है। 7 ÷ 7 = 1, अब रुक जाओ।
स्टेप 7: हमने 2, 2, 3, 3, 5 और 7 से भाग दिया। 2 दो बार और 3 दो बार आया, इसलिए दोनों वर्ग में लिखो।
अंतिम उत्तर: 1260 = 2² × 3² × 5 × 7
अब तुम करो: 180 का अभाज्य गुणनखंडन घात में लिखो।
उत्तर: 180 = 2² × 3² × 5 (जाँच: 4 × 9 × 5 = 180)
प्रश्न 10: 2³ × 3² × 5 कौन-सी संख्या है?
प्रश्न क्या कह रहा है? अभाज्य गुणनखंडन दिया है। उससे असली संख्या वापस बनानी है।
कौन-सा नियम लगेगा? पहले हर घात को खोलो, फिर सबका गुणा करो।
हल:
स्टेप 1: हर घात को खोलो: 2³ = 2 × 2 × 2 = 8 और 3² = 3 × 3 = 9
स्टेप 2: अब एक-एक करके गुणा करो।
अंतिम उत्तर: 2³ × 3² × 5 = 360
अब तुम करो: 2² × 5² कौन-सी संख्या है?
उत्तर: 4 × 25 = 100
प्रश्न 11: अभाज्य गुणनखंड 2, 2, 3, 3, 7 वाली संख्या
प्रश्न क्या कह रहा है? किसी संख्या के सारे अभाज्य गुणनखंड दिए हैं। वह संख्या ढूँढनी है।
कौन-सा नियम लगेगा? संख्या = उसके सारे अभाज्य गुणनखंडों का गुणा।
हल:
स्टेप 1: सबको एक-एक करके गुणा करो।
स्टेप 2: 2 दो बार और 3 दो बार आया है, इसलिए घात में 2² और 3² लिखो।
अंतिम उत्तर: संख्या 252 है, और 252 = 2² × 3² × 7
अभाज्य गुणनखंडन उल्टा भी चलता है: गुणनखंड दिए हों, तो गुणा करके संख्या वापस मिल जाती है।
अब तुम करो: अभाज्य गुणनखंड 2, 3, 3, 5 वाली संख्या क्या है?
उत्तर: 2 × 3 × 3 × 5 = 90
प्रश्न 12: क्या 91 अभाज्य है?
प्रश्न क्या कह रहा है? क्या 91 का 1 और 91 के अलावा भी कोई गुणनखंड है?
कौन-सा नियम लगेगा? अभाज्य संख्याओं 2, 3, 5, 7, ... से बारी-बारी जाँचो। 7 × 7 = 49 है, जो 91 से छोटा है। इसलिए 7 से भी जाँचना ज़रूरी है।
हल:
स्टेप 1: 91 विषम है, इसलिए 2 से भाग नहीं जाता।
स्टेप 2: अंकों का जोड़ 9 + 1 = 10 है, जो 3 से नहीं जाता। आखिरी अंक 1 है, इसलिए 5 से भी नहीं।
स्टेप 3: अब 7 से भाग देकर देखो।
- 91 का पहला अंक 9 है। 9 में 7 जा सकता है, इसलिए 9 से शुरू करो।
अब 9 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 1 = 7 और 7 × 2 = 14 होता है।
14 तो 9 से बड़ा है, इसलिए 1 बार ही ले सकते हैं।
भागफल में 1 लिखो, और 9 के नीचे 7 लिखो।
अब 9 में से 7 माइनस करो: 9 − 7 = 2, यानी 2 बच गया। - अब 91 का अगला अंक 1 नीचे लाओ। बचे हुए 2 के साथ मिलकर 21 बन गया।
अब 21 में 7 कितनी बार जाएगा? 7 का पहाड़ा देखो।
7 × 3 = 21 होता है, यानी ठीक 21 बन जाता है।
भागफल में 3 लिखो, और 21 के नीचे 21 लिखो।
अब 21 में से 21 माइनस करो: 21 − 21 = 0, यानी कुछ नहीं बचा।
अब 91 का कोई अंक नहीं बचा, इसलिए भाग पूरा हो गया।
इसलिए 91 ÷ 7 में भागफल 13 है और शेष 0 है। यानी 91 = 7 × 13
जाँच: भागफल × भाजक = भाज्य होना चाहिए। 13 × 7 = 91 ✓
अंतिम उत्तर: 91 = 7 × 13 है। 1 और 91 के अलावा 7 और 13 भी गुणनखंड हैं, इसलिए 91 अभाज्य नहीं, भाज्य है।
अब तुम करो: क्या 119 अभाज्य है?
उत्तर: नहीं। 119 ÷ 7 = 17, शेष 0, इसलिए 119 = 7 × 17 भाज्य है।
जल्दी दोहराओ
- वास्तविक संख्याएँ = परिमेय और अपरिमेय, दोनों मिलाकर।
- परिमेय संख्या रूप में लिखी जा सकती है, जहाँ p, q पूर्णांक हैं और q शून्य नहीं है।
- अपरिमेय नहीं लिखी जा सकती, जैसे √2 और π
- हर √ वाली संख्या अपरिमेय नहीं होती, जैसे √9 = 3 परिमेय है।
- π = नहीं है, सिर्फ पास की वैल्यू है।
- गुणनखंड से पूरा भाग जाता है। गुणज पहाड़े में आता है।
- अभाज्य संख्या के ठीक 2 गुणनखंड होते हैं। 1 अभाज्य नहीं है। 2 अकेली सम अभाज्य संख्या है।
- सहअभाज्य संख्याओं का साझा गुणनखंड सिर्फ 1 होता है।
- 2³ = 2 × 2 × 2 = 8, घात बताती है कि आधार कितनी बार गुणा हुआ।
- भाग में जब उतारे गए अंक में भाग न जाए, तो भागफल में 0 लिखो।
अभाज्य गुणनखंडन के स्टेप
- सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 से भाग दो। जब तक भाग जाए, उसी से देते रहो।
- फिर अगली अभाज्य संख्या 3, 5, 7, ... लो।
- भागफल 1 आए, तो रुक जाओ।
- सारे भाजकों का गुणा लिखो, एक जैसी संख्याएँ घात में।
- वापस गुणा करके जाँचो।