6. प्रश्नावली 1.2: सारे प्रश्न, पूरे हल

Lesson 6

प्रश्नावली 1.2: सारे प्रश्न, पूरे हल

Intermediate 50 मिनट

You need before starting

  • पाठ 5, अपरिमेय संख्याएँ और उल्टा मानकर सिद्ध करना

इस पाठ में आप क्या सीखोगे

  • प्रश्नावली 1.2 के सारे 3 प्रश्न, हर भाग के साथ, बिल्कुल किताब के क्रम में।
  • हर उपपत्ति का पूरा हल, हर कदम का कारण बताकर।
  • हर प्रश्न के बाद उसी तरह का एक छोटा प्रश्न, खुद करने के लिए।

पहले यह समझ लो कि कौन-सा तरीका कब लगेगा। इस प्रश्नावली में दो तरह की संख्याएँ हैं:

संख्या कैसी हैतरीका
सिर्फ √p हो (जैसे √5)√5 = मानो, वर्ग करो, फिर दिखाओ कि a और b दोनों में 5 से भाग जाता है
√p के साथ कोई संख्या जुड़ी, घटी, या गुणा-भाग में हो (जैसे 6 + √2, 7√5)√p को एक तरफ अकेला करो, वह परिमेय निकलेगा, जबकि वह अपरिमेय है

दोनों तरीकों में शुरुआत एक ही है: जो सिद्ध करना है, उसका उल्टा मान लो। यह पाठ 5 में सीखा था।

प्रश्न 1

1. सिद्ध कीजिए कि √5 एक अपरिमेय संख्या है।

प्रश्न क्या कह रहा है? दिखाना है कि √5 को "पूर्णांक/पूर्णांक" वाली भिन्न में नहीं लिख सकते।

कौन-सा तरीका लगेगा? पाठ 5 की प्रमेय 1.3 में √2 वाला तरीका। 5 अभाज्य है, इसलिए प्रमेय 1.2 लगेगी। प्रमेय 1.2 याद करो: किसी अभाज्य संख्या से a² में पूरा भाग जाए, तो a में भी पूरा भाग जाता है।

हल:

स्टेप 1: उल्टा मान लेते हैं।

मान लेते हैं कि √5 एक परिमेय संख्या है। तब इसे भिन्न में लिख सकते हैं:

√5 =

यहाँ a, b पूर्णांक हैं और b ≠ 0 है। हम यह भी मानते हैं कि a और b सहअभाज्य हैं। यानी इनमें 1 के अलावा कुछ साझा नहीं है। ऐसा मान सकते हैं, क्योंकि हर भिन्न को काटकर सबसे छोटे रूप में लिखा जा सकता है।

स्टेप 2: भिन्न हटाने के लिए दोनों तरफ b से गुणा करते हैं।

√5 × b = × b

दाईं तरफ ऊपर का b और नीचे का b कट जाते हैं, और a बचता है। इसलिए:

b√5 = a

स्टेप 3: √ हटाने के लिए दोनों तरफ का वर्ग करते हैं।

(b√5)² = a²

बाईं तरफ (b√5)² = b√5 × b√5 है। b × b = b² होता है, और √5 × √5 = 5 होता है। इसलिए:

b² × 5 = a²
5b² = a²

यानी a² = 5b² है। इसका मतलब a² में 5 से पूरा भाग जाता है।

स्टेप 4: प्रमेय 1.2 लगाते हैं।

5 अभाज्य है, और 5 से a² में पूरा भाग जाता है। इसलिए प्रमेय 1.2 से a में भी 5 से पूरा भाग जाएगा। तो a किसी पूर्णांक का 5 गुना है। उस पूर्णांक को c कहो:

a = 5c

स्टेप 5: a = 5c को पिछले समीकरण में रखते हैं।

हमारे पास था:

5b² = a²

a की जगह 5c रखो:

5b² = (5c)²

(5c)² = 5c × 5c = 25c² होता है। इसलिए:

5b² = 25c²

दोनों तरफ 5 से भाग दो:

=

बाईं तरफ 5 कट जाता है, और b² बचता है। दाईं तरफ 25 ÷ 5 = 5 होता है। इसलिए:

b² = 5c²

यानी b² में भी 5 से पूरा भाग जाता है। प्रमेय 1.2 से b में भी 5 से पूरा भाग जाएगा।

स्टेप 6: उलटी बात को समझते हैं।

हमने शुरुआत में माना था कि √5 = है। यह भी माना था कि a, b में 1 के अलावा कुछ साझा नहीं है। लेकिन हल करने पर पता चला कि a और b दोनों में 5 से पूरा भाग जाता है। यानी 5 उनका साझा गुणनखंड है। ये दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं। इसलिए शुरुआत में हमने जो माना था कि √5 परिमेय है, वह गलत है।

अतः √5 एक अपरिमेय संख्या है।

कॉपी में पूरा हल
माना √5 एक परिमेय संख्या है
तब √5 = ,जहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0
⇒ b√5 = a(दोनों तरफ b से गुणा करने पर)
⇒ (b√5)² = a²(दोनों तरफ वर्ग करने पर)
⇒ 5b² = a²... (1)
⇒ 5 से a² में भाग जाता है
⇒ 5 से a में भी भाग जाता है(प्रमेय 1.2 से)
माना a = 5c,जहाँ c एक पूर्णांक है
(1) में रखने पर,5b² = (5c)²
⇒ 5b² = 25c²
⇒ b² = 5c²(दोनों तरफ 5 से भाग देने पर)
⇒ 5 से b² में भाग जाता है
⇒ 5 से b में भी भाग जाता है(प्रमेय 1.2 से)
⇒ 5,a और b दोनों का साझा गुणनखंड है
पर a और b सहअभाज्य माने थे,यह उलटी बात है
इसलिए √5 को परिमेय मानना गलत था
अतः √5 एक अपरिमेय संख्या है(इति सिद्धम्)

अब तुम करो: √11 को अपरिमेय सिद्ध करते समय a और b दोनों में किससे भाग जाएगा?
उत्तर: 11 से। 11b² = a² आएगा, फिर a = 11c रखकर 11b² = 121c², और 11 से भाग देकर b² = 11c² आएगा।

प्रश्न 2

2. सिद्ध कीजिए कि 3 + 2√5 एक अपरिमेय संख्या है।

प्रश्न क्या कह रहा है? 3 + 2√5 में √5 के साथ 2 का गुणा है। और 3 जुड़ा हुआ है। दिखाना है कि यह अपरिमेय है।

कौन-सा तरीका लगेगा? उल्टा मानो, फिर √5 को एक तरफ अकेला करो। √5 परिमेय निकलेगा। पर प्रश्न 1 में हमने सिद्ध किया है कि √5 अपरिमेय है।

हल:

स्टेप 1: उल्टा मान लेते हैं।

मान लेते हैं कि 3 + 2√5 एक परिमेय संख्या है। तब:

3 + 2√5 =

यहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0 है।

स्टेप 2: पहले 3 हटाते हैं। दोनों तरफ से 3 घटाओ:

3 + 2√5 − 3 = − 3

बाईं तरफ 3 − 3 = 0 हो जाता है। इसलिए:

2√5 = − 3

स्टेप 3: दाईं तरफ को एक भिन्न बनाते हैं।

3 के नीचे कुछ नहीं है, इसलिए 3 = लिखो। अब दोनों के नीचे b है:

− 3 = − =

इसलिए:

2√5 =

स्टेप 4: अब √5 के साथ लगा 2 हटाते हैं। दोनों तरफ 2 से भाग दो:

2√5 ÷ 2 = ÷ 2

बाईं तरफ 2 कट जाता है, और √5 बचता है। दाईं तरफ भिन्न में 2 से भाग देने पर नीचे वाला b, 2b बन जाता है। इसलिए:

√5 =

स्टेप 5: देखते हैं कि कैसी संख्या है।

a और b पूर्णांक हैं, इसलिए ऊपर a − 3b पूर्णांक है। नीचे 2b भी पूर्णांक है, और शून्य नहीं है, क्योंकि b ≠ 0 है। इसलिए परिमेय है। यानी √5 परिमेय हुआ।

स्टेप 6: उलटी बात को समझते हैं।

हल करने पर √5 परिमेय निकला। लेकिन प्रश्न 1 में हम सिद्ध कर चुके हैं कि √5 अपरिमेय है। ये दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं। इसलिए शुरुआत में 3 + 2√5 को परिमेय मानना गलत था।

अतः 3 + 2√5 एक अपरिमेय संख्या है।

कॉपी में पूरा हल
माना 3 + 2√5 एक परिमेय संख्या है
तब 3 + 2√5 = ,जहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0
⇒ 2√5 = − 3(दोनों तरफ से 3 घटाने पर)
⇒ 2√5 =
⇒ √5 = (दोनों तरफ 2 से भाग देने पर)
a, b पूर्णांक हैं और 2b ≠ 0,इसलिए परिमेय है
⇒ √5 परिमेय है
पर √5 अपरिमेय है(प्रश्न 1 से),यह उलटी बात है
इसलिए 3 + 2√5 को परिमेय मानना गलत था
अतः 3 + 2√5 एक अपरिमेय संख्या है(इति सिद्धम्)

अब तुम करो: 1 + 3√2 को अपरिमेय सिद्ध करते समय √2 किसके बराबर आएगा?
उत्तर: 1 + 3√2 = मानो। 1 घटाओ, तो 3√2 = − 1 = आता है। फिर 3 से भाग दो: √2 =

प्रश्न 3

3. सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित संख्याएँ अपरिमेय हैं: (i) (ii) 7√5 (iii) 6 + √2

(i) 1/√2

(i) सिद्ध कीजिए कि अपरिमेय है।

प्रश्न क्या कह रहा है? का मतलब है 1 में √2 से भाग। दिखाना है कि यह अपरिमेय है।

कौन-सा तरीका लगेगा? उल्टा मानो। फिर भिन्न को ऊपर-नीचे पलटकर √2 को अकेला करो।

हल:

स्टेप 1: उल्टा मान लेते हैं।

मान लेते हैं कि एक परिमेय संख्या है। तब:

=

यहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0 है। शून्य नहीं है, क्योंकि 1 में किसी संख्या से भाग देकर 0 नहीं आता। इसलिए a भी शून्य नहीं है।

स्टेप 2: दोनों तरफ को ऊपर-नीचे पलटते हैं।

पलटना क्यों सही है? दो संख्याएँ बराबर हों, तो उनके "1 बटा" भी बराबर होते हैं। जैसे = है, तो = भी है।

बाईं तरफ को पलटो, तो = √2 बनता है। दाईं तरफ को पलटो, तो बनता है। इसलिए:

√2 =

स्टेप 3: देखते हैं कि कैसी संख्या है।

ऊपर b पूर्णांक है, और नीचे a पूर्णांक है। स्टेप 1 में देखा था कि a ≠ 0 है। इसलिए परिमेय है। यानी √2 परिमेय हुआ।

स्टेप 4: उलटी बात को समझते हैं।

हल करने पर √2 परिमेय निकला। लेकिन पाठ 5 की प्रमेय 1.3 में हम सिद्ध कर चुके हैं कि √2 अपरिमेय है। ये दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं। इसलिए को परिमेय मानना गलत था।

अतः एक अपरिमेय संख्या है।

कॉपी में पूरा हल
माना एक परिमेय संख्या है
तब = ,जहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं,b ≠ 0 और a ≠ 0
⇒ √2 = (दोनों तरफ ऊपर-नीचे पलटने पर)
a, b पूर्णांक हैं और a ≠ 0,इसलिए परिमेय है
⇒ √2 परिमेय है
पर √2 अपरिमेय है(प्रमेय 1.3 से),यह उलटी बात है
इसलिए को परिमेय मानना गलत था
अतः एक अपरिमेय संख्या है(इति सिद्धम्)

(ii) 7√5

(ii) सिद्ध कीजिए कि 7√5 अपरिमेय है।

प्रश्न क्या कह रहा है? 7√5 का मतलब 7 × √5 होता है। दिखाना है कि यह अपरिमेय है।

हल:

स्टेप 1: उल्टा मान लेते हैं।

मान लेते हैं कि 7√5 एक परिमेय संख्या है। तब:

7√5 =

यहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0 है।

स्टेप 2: √5 को अकेला करते हैं। √5 के साथ 7 का गुणा है, इसलिए दोनों तरफ 7 से भाग दो:

7√5 ÷ 7 = ÷ 7

बाईं तरफ 7 कट जाता है, और √5 बचता है। दाईं तरफ भिन्न में 7 से भाग देने पर नीचे वाला b, 7b बन जाता है। इसलिए:

√5 =

स्टेप 3: ऊपर a पूर्णांक है। नीचे 7b पूर्णांक है, और शून्य नहीं है। इसलिए परिमेय है। यानी √5 परिमेय हुआ।

स्टेप 4: उलटी बात को समझते हैं।

हल करने पर √5 परिमेय निकला। लेकिन प्रश्न 1 में हम सिद्ध कर चुके हैं कि √5 अपरिमेय है। ये दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं। इसलिए 7√5 को परिमेय मानना गलत था।

अतः 7√5 एक अपरिमेय संख्या है।

कॉपी में पूरा हल
माना 7√5 एक परिमेय संख्या है
तब 7√5 = ,जहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0
⇒ √5 = (दोनों तरफ 7 से भाग देने पर)
a, b पूर्णांक हैं और 7b ≠ 0,इसलिए परिमेय है
⇒ √5 परिमेय है
पर √5 अपरिमेय है(प्रश्न 1 से),यह उलटी बात है
इसलिए 7√5 को परिमेय मानना गलत था
अतः 7√5 एक अपरिमेय संख्या है(इति सिद्धम्)

(iii) 6 + √2

(iii) सिद्ध कीजिए कि 6 + √2 अपरिमेय है।

प्रश्न क्या कह रहा है? 6 + √2 में 6 परिमेय है और √2 अपरिमेय है। दिखाना है कि इनका जोड़ अपरिमेय है।

हल:

स्टेप 1: उल्टा मान लेते हैं।

मान लेते हैं कि 6 + √2 एक परिमेय संख्या है। तब:

6 + √2 =

यहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0 है।

स्टेप 2: √2 को अकेला करते हैं। दोनों तरफ से 6 घटाओ:

6 + √2 − 6 = − 6

बाईं तरफ 6 − 6 = 0 हो जाता है। इसलिए:

√2 = − 6

स्टेप 3: दाईं तरफ को एक भिन्न बनाते हैं। 6 = लिखो:

− 6 = − =

इसलिए:

√2 =

स्टेप 4: ऊपर a − 6b पूर्णांक है, नीचे b पूर्णांक है और शून्य नहीं है। इसलिए परिमेय है। यानी √2 परिमेय हुआ।

स्टेप 5: उलटी बात को समझते हैं।

हल करने पर √2 परिमेय निकला। लेकिन प्रमेय 1.3 से √2 अपरिमेय है। ये दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं। इसलिए 6 + √2 को परिमेय मानना गलत था।

अतः 6 + √2 एक अपरिमेय संख्या है।

कॉपी में पूरा हल
माना 6 + √2 एक परिमेय संख्या है
तब 6 + √2 = ,जहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0
⇒ √2 = − 6(दोनों तरफ से 6 घटाने पर)
⇒ √2 =
a, b पूर्णांक हैं और b ≠ 0,इसलिए परिमेय है
⇒ √2 परिमेय है
पर √2 अपरिमेय है(प्रमेय 1.3 से),यह उलटी बात है
इसलिए 6 + √2 को परिमेय मानना गलत था
अतः 6 + √2 एक अपरिमेय संख्या है(इति सिद्धम्)

अब तुम करो: को अपरिमेय सिद्ध करते समय पलटने के बाद क्या मिलेगा?
उत्तर: = मानो। पलटने पर √3 = आएगा, जो परिमेय है। पर पाठ 5 के उदाहरण 5 से √3 अपरिमेय है।

एक और हल किया हुआ प्रश्न (किताब से नहीं)

प्रश्न: सिद्ध कीजिए कि 2 − 3√5 एक अपरिमेय संख्या है।

कौन-सा तरीका लगेगा? √5 को अकेला करने वाला तरीका। यहाँ √5 के साथ 3 का गुणा भी है, और वह 2 में से घटाया भी गया है।

हल:

स्टेप 1: उल्टा मान लेते हैं। मान लो 2 − 3√5 परिमेय है। तब:

2 − 3√5 =

यहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0 है।

स्टेप 2: 3√5 के आगे ऋण है। उसे हटाने के लिए दोनों तरफ 3√5 जोड़ो:

2 − 3√5 + 3√5 = + 3√5
2 = + 3√5

अब दोनों तरफ से घटाओ:

2 − = 3√5

स्टेप 3: बाईं तरफ एक भिन्न बनाओ। 2 = लिखो:

− = 3√5
= 3√5

स्टेप 4: √5 के साथ लगा 3 हटाओ। दोनों तरफ 3 से भाग दो:

÷ 3 = 3√5 ÷ 3
= √5

स्टेप 5: ऊपर 2b − a पूर्णांक है, नीचे 3b पूर्णांक है और शून्य नहीं है। इसलिए √5 परिमेय हुआ। पर प्रश्न 1 से √5 अपरिमेय है। ये दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं। इसलिए 2 − 3√5 को परिमेय मानना गलत था।

अतः 2 − 3√5 एक अपरिमेय संख्या है।

कॉपी में पूरा हल
माना 2 − 3√5 एक परिमेय संख्या है
तब 2 − 3√5 = ,जहाँ a, b सहअभाज्य पूर्णांक हैं और b ≠ 0
⇒ 2 = + 3√5(दोनों तरफ 3√5 जोड़ने पर)
⇒ 2 − = 3√5(दोनों तरफ से घटाने पर)
⇒ = 3√5
⇒ √5 = (दोनों तरफ 3 से भाग देने पर)
a, b पूर्णांक हैं और 3b ≠ 0,इसलिए परिमेय है
⇒ √5 परिमेय है
पर √5 अपरिमेय है(प्रश्न 1 से),यह उलटी बात है
अतः 2 − 3√5 एक अपरिमेय संख्या है(इति सिद्धम्)

जल्दी दोहराओ

  • प्रश्नावली 1.2 में 3 प्रश्न और कुल 5 भाग हैं। सबका पूरा हल ऊपर है।
  • सिर्फ √p हो: √p = मानो, वर्ग करो, फिर दिखाओ कि a और b दोनों में p से भाग जाता है।
  • √p के साथ कोई संख्या हो: √p को अकेला करो, वह परिमेय निकलेगा, जबकि वह अपरिमेय है।
  • जैसी संख्या में ऊपर-नीचे पलटो, और लिखो कि a ≠ 0 है।
  • हर उपपत्ति के आखिर में साफ लिखो: शुरुआत में जो माना था वह गलत है, इसलिए संख्या अपरिमेय है।